भारत ने गंवाया एकमात्र विदेशी सैन्य अड्डा, चीन-पाक बॉर्डर पर निगरानी हुई कमजोर

सुमित: भारत के लिए विदेश में अपना एकमात्र सैन्य अड्डा खाली करना एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक और रणनीतिक झटका माना जा रहा है. हाल ही में, भारत ने ताजिकिस्तान में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अयनी एयरबेस (Ayni Airbase) से अपने सभी सैन्य कर्मियों और उपकरणों को हटा लिया है.

अयनी एयरबेस का महत्व

यह एयरबेस भारत के लिए मध्य एशिया में सैन्य और खुफिया पहुँच का एक महत्वपूर्ण केंद्र था. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती थी. यह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के करीबी क्षेत्रों पर निगरानी रखने में मदद करता था.

यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और चीन की पश्चिमी सीमाओं पर भारत की सैन्य पहुँच को मजबूत करता था.

अयनी बेस से भारत चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने की क्षमता रखता था.

भारत को झटका, चीन-रूस का प्रभाव बढ़ा

अयनी एयरबेस से हटने के कारण, इस क्षेत्र में भारत का सैन्य प्रभाव सीमित हो गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस और चीन के बढ़ते दबाव के कारण ताजिकिस्तान ने लीज की अवधि को आगे नहीं बढ़ाया, जिससे भारत को यह बेस खाली करना पड़ा. इस कदम से मध्य एशिया में चीन और रूस का रणनीतिक प्रभाव और अधिक मजबूत होगा.

भारत को अब क्षेत्रीय प्रभाव बनाए रखने के लिए मुख्य रूप से आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों पर निर्भर रहना होगा, जो सैन्य उपस्थिति जितना मजबूत विकल्प नहीं है. भारत सरकार ने इस वापसी को एक द्विपक्षीय समझौते के समापन के रूप में बताया है, जबकि कई रणनीतिकार इसे क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में बड़ा बदलाव और भारत की विदेश नीति के लिए एक चुनौती मान रहे हैं.

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