तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार और हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (HCU) के छात्रों के बीच 400 एकड़ जमीन को लेकर विवाद छिड़ गया है. सरकार का कहना है कि यह जमीन सरकारी है और उसे समतल करके विकसित किया जाएगा. जबकि HCU के छात्र, पर्यावरणविद और विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं. “वाता फाउंडेशन” और HCU के छात्रों ने इस मुद्दे पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने इस भूमि को राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने की मांग की है. हाई कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए सरकार को आदेश दिया है कि इस जगह पर पेड़ों को काटने का काम तत्काल रोका जाए. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि गुरुवार तक कोई काम नहीं किया जाएगा. मामले की अगली सुनवाई कल, यानी 5 अप्रैल को होगी।हाई कोर्ट में 2 अप्रैल को सुनवाई के दौरान, HCU की ओर से एल रविशंकर ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि पिछले साल जून में राज्य सरकार ने जीओ 54 जारी किया था, जिसके तहत 400 एकड़ सरकारी जमीन TGIIC को दी जा रही है. रविशंकर ने कोर्ट को बताया कि यदि यह सरकारी जमीन है, तो भी इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत ही निपटाया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी बताया कि यहां पेड़ काटने का काम चल रहा है, और जमीन को समतल किया जा रहा है। रविशंकर ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, किसी वन क्षेत्र को काटने से पहले विशेषज्ञों की समिति का गठन करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि इस इलाके में 3 झीलें और चट्टानें हैं, साथ ही यहां कई दुर्लभ प्रजातियों के जानवर भी रहते हैं. सरकार की ओर से एजी सुदर्शन रेड्डी ने अपनी बात रखी. उन्होंने कोर्ट में गूगल की तस्वीरें पेश की, जिनसे यह साबित करने की कोशिश की कि यह जमीन जंगल नहीं है. सुदर्शन रेड्डी ने यह भी कहा कि उनके दोस्त के गोल्फ क्लब में मोर, हिरण और सांप जैसे जानवर हैं, लेकिन क्या उसे भी जंगल घोषित कर दिया जाएगा? उन्होंने यह भी बताया कि यह जमीन औद्योगिक उपयोग के लिए है, और इसके पास स्थित HCU के परिसर में कई इमारतें और हेलीपैड हैं।दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद, हाई कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि पेड़ों की कटाई तत्काल रोकी जाए और किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य को गुरुवार तक के लिए रोक दिया जाए. इस मामले की अगली सुनवाई 5 अप्रैल को होगी. यह विवाद अब कोर्ट में लगातार सुनवाई का विषय बन चुका है, और इस पर अगले दिन फिर से चर्चा होगी.
