सुमित: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गंभीर होते वायु प्रदूषण के खिलाफ इंडिया गेट पर नागरिकों का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन उस समय मार्मिक मोड़ पर आ गया, जब दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर कई अभिभावकों, छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने रविवार को इंडिया गेट पर एकजुट होकर सरकार से तत्काल और ठोस कार्रवाई की मांग की.
प्रदूषण के खिलाफ अपनी सांसों की लड़ाई को लेकर सड़क पर उतरे इन प्रदर्शनकारियों ने साफ हवा में जीने के अपने संवैधानिक अधिकार को बहाल करने की अपील की. उनके हाथों में तख्तियाँ थीं, जिन पर ‘हमें सांस लेने दो’, ‘बच्चों के फेफड़े खतरे में’ जैसे संदेश लिखे थे.
हालांकि, कुछ ही देर में दिल्ली पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने का हवाला देते हुए दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया. यह घटनाक्रम बेहद संवेदनशील रहा, क्योंकि जहां एक ओर लोग अपने जीवन के सबसे बुनियादी अधिकार—साफ हवा—के लिए विरोध कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर उन्हें हिरासत में लेकर उनके आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया गया.
प्रदर्शनकारियों को ले जाती पुलिस वैन में बैठे मायूस चेहरों ने स्पष्ट कर दिया कि इस लोकतांत्रिक देश में जनता की सबसे बड़ी त्रासदी क्या है—जब हवा ज़हरीली हो, और आवाज़ भी दबा दी जाए. यह घटना दर्शाती है कि जब प्रदूषण एक राष्ट्रीय संकट बन चुका है, तब भी नागरिक आवाज को सुनने के बजाय उसे बंद करने पर ज़ोर दिया जा रहा है.