अरशद खान: पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में रविवार को माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया, क्योंकि प्रशासन द्वारा हाल ही में दो बड़े विवादों को सुलझा लेने के बावजूद छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा. यूनिवर्सिटी ने छात्रों से हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का अपना फैसला वापस ले लिया है, और केंद्र सरकार ने भी सीनेट-सिंडिकेट को भंग करने वाली विवादास्पद अधिसूचना रद्द करने की घोषणा कर दी है.
लेकिन छात्रों का विरोध थमा नहीं, अगली और मुख्य मांग पर अड़े छात्र:
सीनेट के सभी 91 सदस्यों के चुनाव की तारीखें तत्काल घोषित की जाएं. छात्रों का कहना है कि अधिसूचना वापस लेना केवल पहला कदम है, लेकिन जब तक लोकतांत्रिक रूप से चुनी जाने वाली सीनेट के चुनाव की तारीखें सामने नहीं आतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा.
रविवार को प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर चंडीगढ़ पुलिस के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की, जिसके बाद कैंपस को छावनी में तब्दील कर दिया गया. विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा मंत्रालय की अधिसूचना के बाद सीनेट चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. हालांकि, छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे चुनाव की तारीख घोषित होने तक आंदोलन को और तेज़ करेंगे.
यूनिवर्सिटी बचाओ मोर्चा और अन्य छात्र संगठनों ने सोमवार को पीयू बंद का आह्वान भी किया है, जिससे आगामी दिनों में तनाव बढ़ने की आशंका है. यह घटनाक्रम दिखाता है कि छात्र सीनेट की लोकतांत्रिक संरचना को बहाल करने के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं.