केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का लोकसभा में बयान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में वक्फ विधेयक का समर्थन करते हुए विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पूरी तरह से सही है और इसे लागू करना भारत सरकार और संसद का अधिकार है। उन्होंने विपक्षी सांसदों पर आरोप लगाया कि उन्होंने धमकी दी थी कि अल्पसंख्यक इस कानून को स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन शाह ने इसे देश के सभी नागरिकों के लिए जरूरी कानून बताया और कहा कि सभी को इसे स्वीकार करना होगा।अमित शाह ने वक्फ बोर्ड और परिषदों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने की बात भी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये निकाय धार्मिक उद्देश्यों के तहत संपत्तियों का प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए हैं। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि अगर 2013 में वक्फ अधिनियम में संशोधन नहीं किया गया होता, तो इस विधेयक की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने आरोप लगाया कि 2013 में रातों-रात वक्फ अधिनियम में बदलाव किया गया था, जिसका उद्देश्य चुनावी तुष्टीकरण था। इसके कारण 123 वीवीआईपी संपत्तियां लुटियंस दिल्ली में वक्फ को सौंप दी गईं।अमित शाह ने विपक्ष पर यह भी आरोप लगाया कि वक्फ विधेयक को लेकर एक और भ्रांति फैलाई जा रही है, कि यह पिछली तिथि से लागू होगा। उन्होंने कहा कि विधेयक में स्पष्ट रूप से यह लिखा गया है कि इसे सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ही लागू किया जाएगा, न कि पिछली तिथि से।गृह मंत्री ने इस बात को भी खारिज किया कि यह विधेयक मुसलमानों के धार्मिक आचरण या उनके दान की गई संपत्तियों में हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल वक्फ बोर्ड के प्रशासन को सही दिशा में चलाने के लिए है, और इसका उद्देश्य वक्फ बोर्ड में चल रहे भ्रष्टाचार को खत्म करना है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से आग्रह किया कि वे मिथक और भ्रम फैलाने से बचें, जो केवल देश को तोड़ने की दिशा में काम करते हैं।अमित शाह ने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड को धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्था के रूप में देखा जाना चाहिए, और इसे सुधारने के लिए यह विधेयक जरूरी है।

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