आजकल भारत में नशे की लत एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जो विशेष रूप से युवाओं को प्रभावित कर रही है। यह समस्या न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर भी संकट पैदा कर रही है. नशे की आदत ने न केवल हमारे युवाओं के जीवन को नष्ट किया है, बल्कि पूरे समाज की संरचना को भी कमजोर किया है. वहीं पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ एक मुहीम शुरू कर दी है. पंजाब सरकार ने बुधवार को लुधियाना से ‘युद्ध नशों के खिलाफ’ अभियान की शुरुआत की. इस अभियान के तहत एक पदयात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थी भी शामिल हुए. अगले एक महीने तक यह अभियान पंजाब के विभिन्न शहरों में चलेगा, और एक मई से इसे ग्रामीण इलाकों में भी शुरू किया जाएगा.मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस अभियान के दौरान विद्यार्थियों को एक विशेष नंबर जारी किया, जिसे वे नशे के व्यापार या सेवन की जानकारी देने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि सूचित करने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी और कठोर कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने पंजाब पुलिस की सराहना की, जिन्होंने नशे के खिलाफ संघर्ष में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. उन्होंने कहा, “लोगों की नसों में समाए नशे को निकालना बहुत कठिन काम है.”मुख्यमंत्री भगवंत मान के बाद, आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया. उन्होंने कहा, “आप ही भविष्य में पंजाब के नेता होंगे, लेकिन जिस तेजी से नशा घर-घर फैल रहा है, यदि पंजाब के तीन करोड़ लोग इसे खत्म नहीं करते, तो यह प्रदेश कैसे संभाला जाएगा?” केजरीवाल ने पूर्व राजनीतिक दलों को नशे के फैलने का जिम्मेदार ठहराया और कहा, “उन्होंने पंजाब को बर्बाद कर दिया, और भगवान उन्हें कभी माफ नहीं करेगा. अब पंजाब में ‘आप’ की सरकार है, जिसे कोई नहीं रोक सकता.”केजरीवाल ने युवाओं को चेतावनी दी कि वे गलत संगत से बचें, क्योंकि नशे का शिकार होने से जीवन और परिवार बर्बाद हो सकता है. उन्होंने विद्यार्थियों को तीन कसम दिलाई:1. मैं नशा नहीं करूंगा.2. मेरे आसपास अगर कोई नशा करेगा तो उसे बाहर निकालूंगा.3. यदि कहीं नशा बेचा जाएगा, तो मैं उसे सूचित करूंगा.मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उपस्थित युवाओं को पंजाबी में कसम दिलाई: “मैं पंजाब की पवित्र धरती का सच्चा पुत्र हूं. पंजाब की मिट्टी की सौगंध खाता हूं कि मैं कभी खुद नशा नहीं करूंगा. मैं अपने दोस्त, परिवार और समाज को नशों से दूर रखने की पूरी कोशिश करूंगा. मैं जहां भी नशा बिकते देखूंगा, आवाज उठाऊंगा. मैं डरूंगा नहीं. इस युद्ध में रब्ब मेरे साथ है. मैं नशे का नहीं, शिक्षा का चयन करूंगा. मैं बर्बादी नहीं, तरक्की का चयन करूंगा. मैं चुप नहीं, इंकलाब का चयन करूंगा. मैं वादा करता हूं कि जब तक पंजाब नशा मुक्त नहीं हो जाता, मैं शांति के साथ नहीं बैठूंगा. इंकलाब जिंदाबाद.”यह अभियान पंजाब में नशे के खिलाफ एक बड़ा कदम साबित हो सकता है और राज्य को नशा मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.