दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग ने पकड़ा जोर

सुमित/नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली का नाम बदलकर उसके प्राचीन, पौराणिक नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ को पुनः स्थापित करने की कवायद ने एक बार फिर ज़ोर पकड़ लिया है. इस संबंध में, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कुछ व्यापारिक संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर यह मांग की है.

नाम बदलने की मांग के पीछे मुख्य तर्क यह है कि ‘इंद्रप्रस्थ’ का नाम महाभारत काल से जुड़ा है, जहाँ पांडवों ने यमुना नदी के तट पर इस नगर की स्थापना की थी. यह नाम शहर को उसके पाँच हजार साल पुराने गौरवशाली इतिहास से जोड़ता है.

वर्तमान नाम पर मतभेद: मांग करने वालों का कहना है कि वर्तमान ‘दिल्ली’ नाम की तुलना में ‘इंद्रप्रस्थ’ भारत की सभ्यता और संस्कृति का अधिक सटीक प्रतिनिधित्व करता है.

प्रस्तावित बदलाव: बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने गृह मंत्री को लिखे पत्र में केवल दिल्ली शहर का नाम ही नहीं, बल्कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम ‘इंद्रप्रस्थ जंक्शन’ और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ एयरपोर्ट’ करने की भी मांग की है.

सरकार का रुख: हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर आधिकारिक तौर पर कोई कदम नहीं उठाया गया है. नाम बदलने की यह मांग, देश में ऐतिहासिक स्थानों और शहरों के नाम बदलने की चल रही व्यापक बहस का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य औपनिवेशिक या विदेशी प्रभावों से जुड़ी पहचान को हटाकर भारतीय विरासत को प्रमुखता देना है.

इस पहल ने राजनीतिक गलियारों और ऐतिहासिक विशेषज्ञों के बीच एक नई चर्चा छेड़ दी है कि क्या नाम बदलने से शहर की पहचान और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा या यह सिर्फ अनावश्यक विवाद पैदा करेगा.

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