अरशद खान: भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार, चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों द्वारा EVM और वीवीपीएटी (VVPAT) मशीनों की माइक्रो-कंट्रोलर चिप्स की जांच के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। यह मंजूरी ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) के तहत दी गई है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2024 के निर्देश के बाद तैयार किया गया था।
जांच की प्रक्रिया और मुख्य बिंदु
इस जांच प्रक्रिया को लेकर कुछ महत्वपूर्ण नियम और शर्तें निर्धारित की गई हैं:
कौन कर सकता है आवेदन: चुनाव में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार परिणामों की घोषणा के 7 दिनों के भीतर जांच की मांग कर सकते हैं।
जांच का खर्च: इसका पूरा खर्च शिकायत करने वाले उम्मीदवार को उठाना होगा। यदि मशीन में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो यह शुल्क वापस कर दिया जाएगा।
जांच का स्तर: यह जांच केवल प्रशासनिक नहीं होगी, बल्कि BEL (Bharat Electronics Limited) और ECIL (Electronics Corporation of India Limited) के इंजीनियरों द्वारा मशीनों की मेमोरी और माइक्रो-कंट्रोलर की शुद्धता को सत्यापित किया जाएगा।
महत्वपूर्ण तथ्य: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि EVM के माइक्रो-कंट्रोलर ‘अज्ञेयवादी’ (Agnostic) होते हैं, यानी उनमें एक बार प्रोग्राम डालने के बाद बदलाव नहीं किया जा सकता। फिर भी, जनता के भरोसे को मजबूत करने के लिए यह संवैधानिक विकल्प दिया गया है।
इस कदम का महत्व
विपक्ष और कई नागरिक समूहों द्वारा लंबे समय से EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे थे। चुनाव आयोग का यह निर्णय न केवल संदेहों को दूर करने में मदद करेगा, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) के एक नए युग की शुरुआत करेगा।